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भय्यू महाराज ने गत दिनों इंदौर स्थित अपने घर में खुदकशी कर ली थी।

EXCLUSIVE: गुमनाम पत्र से उठ सकता है भय्यू महाराज की मौत से पर्दा, पत्‍नी आयुषी पर लगे आरोप

इंदौर, जेएनएन। दिवंगत संत भय्यू महाराज के जीवन में उसी दिन से कलह ने घर बना लिया था, जिस दिन डॉ. आयुषी ने उनसे विवाह किया था। दूसरी पत्नी ने पहले उन्हें घर वालों से दूर करना शुरू किया, फिर आश्रम में भाई और चाचा की एंट्री करवा दी। भय्यू महाराज पर अपनी बेटी कुहू से दूरी बनाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। प्रॉपर्टी और कैश पर भी नजरें गड़ा लीं। उक्त आरोप भय्यू महाराज के कथित सेवादार ने लगाए हैं। उसने 11 पन्नों का गुप्त पत्र डीआइजी को भेजा है, जिसमें आश्रम और परिवार की गोपनीय बातों का उल्लेख है। डीआइजी ने पत्र की सच्चाई जांचने का आदेश दिया है। गौरतलब है कि भय्यू महाराज ने गत दिनों इंदौर स्थित अपने घर में खुदकशी कर ली थी।

डीआइजी हरिनारायणचारी मिश्र के पास गुरुवार को एक पत्र पहुंचा, जिसमें पत्र लिखने वाले ने कहा कि वह भय्यू महाराज का विश्वसनीय सेवादार है, लेकिन मौत के भय से नाम उजागर करना मुमकिन नहीं है। वह महाराज की मौत का राज जानता है और जिम्मेदार को सजा भी दिलवाना चाहता है। गुप्त सेवादार के मुताबिक, भय्यू महाराज पिछले दो साल से मानसिक तनाव में थे। डॉ. आयुषी से शादी के बाद वह अकेला महसूस करने लगे थे। उनकी दूसरी पत्नी ने निगरानी करनी शुरू कर दी थी। वह आश्रम और घर में होने वाली बैठकों की जानकारी लेने लगी थीं। महाराज से जुड़े हर व्यक्ति और उनके पास आने वालों का हिसाब सेवादार और नौकरों से रखने लगी थीं।

पत्र में लिखा है, 'आयुषी महाराज की पहली पत्नी माधवी के बारे में चर्चा करने पर भड़क जाती थीं। घर में लगी उसकी तस्वीरों को हटवा दिया था। उन्होंने महाराज की बेटी कुहू से बात करने पर भी प्रतिबंध लगा दिया था। महाराज को कई बार करीबियों से छुपकर बातें करना पड़ती थीं। डॉ.आयुषी ने अपनी मां रानी और पिता अतुल शर्मा को इंदौर बुलाया और सिल्वर स्प्रिंग फेज-2 में मकान दिलवा दिया। भाई अभिनव और चाचा उमेश शर्मा को आश्रम में काम पर लगवा दिया। उमेश तो आश्रम से 50 हजार रुपये महीना वेतन भी लेने लगा था। पत्र में यह भी लिखा है कि डॉ. आयुषी महाराज की प्रॉपर्टी (आश्रम और बंगले) हथियाना चाहती थीं। इन सब वजहों से महाराज तनाव में रहने लगे। घर के माहौल के कारण उनकी बहनों और बहनोइयों ने आना बंद कर दिया। तनाव इतना बढ़ा कि महाराज को आत्महत्या करनी पड़ी।'

गोली की आवाज, क्यों नहीं सुनाई दी
सेवादार ने पत्र में लिखा है कि घटना के कुछ देर पहले डॉ. आयुषी घर से कॉलेज गई थीं, लेकिन ऐनवक्त पर लौट आईं। उस वक्त घर में कई सेवादार मौजूद थे, लेकिन किसी ने भी गोली की आवाज नहीं सुनी। पत्र में घर और आश्रम की अंदरूनी बातों का जिक्र किया गया है। इससे यह बात स्पष्ट है कि पत्र लिखने वाला महाराज का करीबी या आश्रम व घर से जुड़ा व्यक्ति ही है।

तथ्यों की जांच होगी
डीआइजी हरिनारायणचारी मिश्र का कहना है कि पत्र गोपनीय और गुमनाम है। फिर भी उसमें लिखे तथ्यों की सच्चाई जांचने का आदेश दिया है।

आयुषी की मां ने पत्र को किया खारिज
डॉ. आयुषी की मां रानी शर्मा ने कहा कि आश्रम और घर से जुड़े बहुत सारे लोग हैं, जो घर बिगाड़ने की फिराक में हैं। पत्र लिखने वाला भी घर का व्यक्ति है। वह नहीं चाहता कि सब कुछ सामान्य हो। पत्र में लिखी बातों में जरा भी सच्चाई नहीं है।

पहली बार सामने आए ऐसे आरोप
सीएसपी व जांच अधिकारी मनोज रत्नाकर का कहना है कि मैंने करीब 30 लोगों के बयान लिए हैं, लेकिन किसी ने इस तरह के आरोप नहीं लगाए।

Input:  jagran